गर चाहते हो जिन्दगी मेरे यार जीने व मरने के बाद भी
लोगों के दिलों में जरूर शीतल व प्यारी यादें छोड जावें
गर चाहतें हो गर खुदाई रहमतें जीते जी व मरने के बाद
मसीहा न अपितु आसपास के निसहायों के दास कहलावो
मसीहों की भरमार से अब दुनिया वाले बहुत उक्ता गये हैं
चाहा न मसीहा बनना उन्होंने धूर्तों की दुकानें सजा गये हैं
प्रथम,चतुर्थ,प्राप्ति,मूर्ख व अनुसरणकर्तागणों को बाद जाँच
मित्र आनन्द ने कहा सही कि पास अपने सदा आप बैठाना
व्यवहार, विचार इनके सदैव जगत में सन्देहास्पद होते हैं
सतर्क चलो जीवन राह, अचेत ही दुष्कर्मों में पग रखते हैं
धन, तन से सेवा नही, सुव्यवहार से जग जीत सकते हो
सतनाम सिंह साहनी (पथिकअनजाना)
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