यार कोई गर राह या बात अलग चुन ही ले
जिसका तुम्हें सपने मे भी यकीन न हो कभी
नही यार गलत समझ लेना उसे तुम कभी भी
चूंकि हो सकता शायद उसकी कोई मजबूरी हो
पथिकअनजाना
(सतनाम सिंह साहनी)
ब्लाग – उसकी कोई मजबूरी हो
पथिक अनजाना व्दारा रचित हिन्दी शायरी /लघुकाव्य/ काव्य की चौथी कडी ब्लागर पर https://pathicaanjana64.blogspot.com
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