उसकी कोई मजबूरी होगी

यह रचियता सतनाम सिंह साहनी जो कि पथिक अनजाना नाम से हिन्दी भाषा में ब्लागों पर अपने स्वविचार प्रकाशनार्थ प्रेषित करते हैं कि यह ब्लागर पर चौथी कडी हैं

शनिवार, 5 सितंबर 2015

अभिव्यक्ति क्रमांक -- ९०४ -- इंसान या तो धार्मिक बने या – पथिक अनजाना

इंसान या तो धार्मिक बने या फिर कहलावे समुदायवादी
बुद्धिमानों ज्ञानियों ने धर्म परिभाषा को स्वहित से जोडा
कही धर्म व धार्मिकता की पहचान को आदर्शता में छोडा
भय दिखा अपने वंशजों की रोटी व ऐश की ओर मोडा हैं
दुकानों हेतू समुदायवादिता को धार्मिकता का नाम ओढा
सारे ज्ञान ग्रन्थ भारतीय संविधान जैसे संशोधित हर दिन
ज्ञान  ज्यों ज्यों घटेगी गणना धरा पर समुदायवादियों की
सत्य त्यों त्यों धर्मावलम्बियों की बढेगी संख्या धरा पर हैं
और वास्तविक धर्म से निखरेगी बने यही धरा सुनहरीवादी
लोभ व्यवसाय छोडो  भविष्य तुम्हें काली – सूची में रखेगा
शस्त्रों से  न मिटे समुदाय सीमा प्रेम समभाव से मिटा दो
नाम चिरस्थायी करने हेतू झूठे इतिहास कालपत्र न सजाओ
दिलों में निशां चिरस्थायी बनाओ, गर्दनें वंशजों की ?????
स्वहित देखना हैं या वंशज किस रूप में आपको याद करें?
अकर्ण्यमता छोडे विचारे न कहे कोई उसकी कोई मजबूरी--
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पथिक अनजाना ( सतनाम सिंह साहनी)
यदि उदगार को रूचिकर व विचारणीय मानते हैं कृपया अग्रेषित करें


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