उसकी कोई मजबूरी होगी

यह रचियता सतनाम सिंह साहनी जो कि पथिक अनजाना नाम से हिन्दी भाषा में ब्लागों पर अपने स्वविचार प्रकाशनार्थ प्रेषित करते हैं कि यह ब्लागर पर चौथी कडी हैं

गुरुवार, 21 जनवरी 2016

अभिव्यक्ति क्रमांक ९१७ -- प्यार खोजते हम रह जाते हैं

देवें जवाब क्यों दिलोदिमाग पर छाये रहते हैं
बीते लम्हों साथ आ हमें हमसे दूर ले जाते हैं
न याद आयें न करें याद हालात यह बताते है
भूलें उन्हें करें याद क्यों जो पथिक कहलाते हैं
दुनिया आपकी मुबारक हो सोये क्यों जगाते हैं
व्यापारी दुनिया में प्यार खोजते हम रह जातेहैं

पथिक अनजाना

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