उसकी कोई मजबूरी होगी

यह रचियता सतनाम सिंह साहनी जो कि पथिक अनजाना नाम से हिन्दी भाषा में ब्लागों पर अपने स्वविचार प्रकाशनार्थ प्रेषित करते हैं कि यह ब्लागर पर चौथी कडी हैं

मंगलवार, 5 जनवरी 2016

अभिव्यक्ति क्रमांक ९१६ -- ज्ञानी इंसान की यही पहचान -- पथिक अनजाना

विचार – विमर्श हेतू जब उभयपक्षों के मध्य हो
गर हो धैर्य, बुद्धिमता का विचार अंह का संहार
लगायें पहले गले समीप बाजू बैठिये करें विचार
करें उन हालों की जहाँ था प्रतिपक्षीव हैं मौजूद
रिश्तेनाते जाति-स्तर मानअपमान का न वजूद
मानें आप हल, शांति  देंगें उपस्थिति का सबूत
तकली पर दुनिया, अंगुलियों में सबंधों का सूत
तो रहे ध्यान विमर्श का यह अनमोल सामान हैं
न सोचें अपमानित होंगें पाये दिली स्थायी मान
कर निर्णय उठें हैं ज्ञानी इंसान की यही पहचान
राहें हो कैसी पर मंजिल बताये पथिक अनजाना

पथिक अनजाना  (  सतनाम  सिंह साहनी)

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