पढा
मैंने कही लिखा किसी ने ये कितना भावुक संदेश हैं
साया सदा सुनता सहता देखता हास परिहास सुख दुख
नही मांगता वह अपनी
पूजा सेवा व संभाल कभी मुझसे
रखी क्यों फिर शर्त
तूने ईश्वर
अपनी पूजा की यहाँ पर
बना इंसा ने तुझे
व्यापारी खुदा ,लगा दिया तेरा मोल हैँ
कहते बन अंहकारी खुद खुदा ने पीटा
जग में ये ढोल है
गर
नही ये हकीकत लुटेरों की खोलता क्यों नही पोल हैं
माना
कि भटकन से बचाने हेतू केन्द्र बिन्दू होना जरूरी
सुकर्मों
पर न हो केन्द्रित खुदा दुकानों की करता मशहूरी
जान
न पावे पथिक इसमें होगी क्या उसकी कोई मजबूरी
पथिक
अनजाना (सतनाम सिंह साहनी)
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