उसकी कोई मजबूरी होगी

यह रचियता सतनाम सिंह साहनी जो कि पथिक अनजाना नाम से हिन्दी भाषा में ब्लागों पर अपने स्वविचार प्रकाशनार्थ प्रेषित करते हैं कि यह ब्लागर पर चौथी कडी हैं

रविवार, 6 दिसंबर 2015

अभिव्यक्ति क्रमांक ९१३ --- सुन रे इंसा न मना -- पथिक अनजाना

प्रकृति की कुछ रचनाये मुझे अचम्भित करती हैं
फल में बीज, बीज से पौधा,पौधे से वृक्ष फिर फल
वक्त करिश्मा देखो फल इक दिन वृक्ष से बिछुडता
क्षुधा शांति फल देता वृक्ष देता शीतल छांव सब को
शांति के बाद क्रान्ति शुरू हो जाती फल से निकल
खुदबखुद बीज जा के जमीन गर्भ में समा जाता हैं
वनस्पति,जीव-उत्पत्ति,प्रकृति बहार,बाजार कहर हो
सुन रे इंसा न मना खुशियाँ पाने न गम जाने काहो
बचने को तूफानों से राह मात्र सुकर्म विचार पाने का
जानपहचान शान मान बिछुडे पथिक बन जीने काहो
पथिक अनजाना  (सतनाम सिंह साहनी)


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