रखा
क्याहैं जिन्दगी में कुछ हमसफर सदैव यहाँ कहा करते हैं
कहता
मैं यही योनि मात्र जो तुम्हारा सच्चा इतिहास बनाती हैं
गर
विचारो तुम्हारे सुकर्म ही तुम्हारी वंशजों को मान दिलातीहैं
जाओ
जिस बस्ती मै वहाँ तुम अपने कदमों के निशान
बनाओ
न
विचारते मार्गदर्शनों को, न जीवन में पास तुम भीड जुटाओ
किसी
बैचेन दुखी दिल को खोज , कोई
उनका प्यारा प्रोत्साहक
मार्गदर्शक या हितकारी
बहुप्रतिक्षित सुसमाचार उन्हें जा सुनाओ
पाकर
तुम्हारे मुखारबिन्द से सुसमाचार याद सदा किये जावोगे
आलों
मे न मेरे यार हो भाग्यशाली उनके दिलों में बस जावोगे
सलाह
का सिला न लेना न सजाई दुकान खुदाई तो गिला नही
समय
तुम न वहाँबर्बाद करना जिनके
पास समय नही कहते हैं
लोग याद रखैं तुम्हैसमाचार से, ऐसे दीवानों को हम तरसते हैं
पथिक
अनजाना ( सतनाम सिंह साहनी)
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