मेरे मरने के बाद न
याद करना मुझे यारों
भूली थी राह हर
कोई मुझे भटका कह गया
समान
मेरे यह बात कई कहकर गुजर गये
कुछ
लिख गये कुछ जुबां पर लाते रह गये
मेरे मरने के बाद
न काँधा देना मुझे यारों
मैं ताउम्र खुद को कांधा देता यहाँ रह
गया
मेरा
परिचय पथिक अनजाना मात्र रह गया
जो
दिल में आया लिख ब्लागों में कह गया
नही
कह सकते , उसकी कोई मजबूरी होगी
सतनाम
सिंह साहनी (पथिकअनजाना)
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