उसकी कोई मजबूरी होगी

यह रचियता सतनाम सिंह साहनी जो कि पथिक अनजाना नाम से हिन्दी भाषा में ब्लागों पर अपने स्वविचार प्रकाशनार्थ प्रेषित करते हैं कि यह ब्लागर पर चौथी कडी हैं

शुक्रवार, 6 नवंबर 2015

अभिव्यक्ति क्रमांक ९१० -- गर न बदली किस्मत तो --- पथिक अनजाना

लोग कहते हैं कि लोग किस्मत बदल लेते हैं
हमने ताउम्र ऐसा कोई इंसान नहीं देखा है
बदली किस्मत गर यह उसकी किस्मत हैं
गर न बदली किस्मत तोउसकी किस्मत हैँ
यह किस्मत बला क्या, होती क्यों हावी हैं
अनचाहे मोडो से इंसा जमात रोती क्यों हैं
लिखता कोई तामीली क्यों इंसा पर होती हैं
लाख बचावी कोशिशें, असफल हो जाती हैं
सोचा न मोड, किस्मत फिर बदल जाती हैं
न पूजा ,पाठ कभी मोड जीवन मे लाता हैं
वक्त बदलने का आता बहाना बन जाता हैं
किस्मत बदले सो काँटे गैरों हेतू बिछाते हो
जा दलदल में फंसते, नही पथिक होजाते हैं
दुष्कर्मफल पा बचाव में कहाते उसकी कोई --
पथिक अनजाना ( सतनाम सिंह साहनी)


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