सत्य संदेश प्रकाशित किया कहीं मेरे किसी प्यारे यार ने
शब्द बस जाते हैं यादों में, चेहरे कहीं जा गुम
हो जाते हैं
प्रकाशित किया किसी अन्य ने कही इक लेख में यार ने
नियंत्रण करो खुद पर सदैव, गर न हो विचार
अनुरूप तो
स्थान वहाँ खडे क्षणिक विचारो खोजो मान्य दोनों को हो
गर न पहुंचो समबिन्दु बेहत्तर होगा विषय छोड देना यार
देखो शब्दों, विचारों में होती मौजूद
विभिन्नता की दीवार
शब्द क्यों रहे याद अलग क्यों होते हमारे उनके विचार हैं
नही सोचते बोलने से पहले, करे न निष्पक्ष हम
विचार हैं
यही खाई अनन्त होती जाती, लगे चुभे मानों
तेज धार हैं
पाये अधिकांश हो मजबूर दबा,विचार शब्द नही बोल
पाते
तरसे बयाँ करने को, मजबूरी रोकती खुद भी गुम
हो जाते
न ले थाह कोई पर विभूषण अवश्य कई बेचारे पा जाते हैं
आओ बैठ सोचे अपने अंह को क्यों किसी हेतू शूल बनायें
आओ बैठकर विचारें हम कैसे अपने शब्दों को फूल बनायें
पथिक अनजाना ( सतनाम
सिंह साहनी)
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