उसकी कोई मजबूरी होगी

यह रचियता सतनाम सिंह साहनी जो कि पथिक अनजाना नाम से हिन्दी भाषा में ब्लागों पर अपने स्वविचार प्रकाशनार्थ प्रेषित करते हैं कि यह ब्लागर पर चौथी कडी हैं

शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2015

अभिव्यक्ति क्रमांक ९०७ -- अतीत प्रश्न समाधान नही - पथिक अनजाना

सम्हल मैं भी रहा हू आहटों को  मैं सुन पा रहा हू
सुकर्मों के लेखों को अब मैं प्रयासों से सजा रहा हू
नेताऔं के उतरते पा वे आडम्बरी  स्वांग रच रहे हैं
शास्त्री, बोस, गोडसे व श्यामाजी न्याय मांग रहे हैं
कयामत शायद आ रही जो अतीत अब जाग रहे हैं
गुजरे शासकों को बेहाल देख हंसू कैसे भाग रहे हैं
सुप्त हुई झंकारे खोये जो भी आडम्बरी राग रहे हैं
लूटे कालेधन की सुरक्षा हेतू विगत शासक जाग रहे
जहाँ बिखरी राख नेहरू की हो शोले बन आग रहे हैं
डाली जहाँ अस्थियाँ थी बनी नेता मित्र बस्तियाँ हैं
श्मशान मे दीवाली हो रही व छाई वहाँ मस्तियाँ हैं
लगता संघर्ष चरमसीमा पर अतीत मूर्त हो जावेगा
लुटेरों का हश्र क्या होगा व शैतान अस्त्र खो जावेगा
न अतीत प्रश्न न समाधान न ही मजबूरी पहचान हैं
हस्तियाँ करें नेतृत्व कैसे कहें ?? कोई मजबूरी होगी
पथिक अनजाना ( सतनाम सिंह साहनी)


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें