आज
तक जितना सुना पढा पाया मैंने आ यहाँ
प्रयास
अनेकों पर निष्फल हुये यहाँ सारे के सारे
राजनेताओं,
धर्मनेताओ के सार्थक प्रयासों से ही
अनथक
प्रयास सुधारको के ग्रन्थों में जा दफनाये
हास्यपद
ग्रन्थ आलों में व सुधारक दीवालें पाते है
हाल
बना जग में कि व्यवसायिक केन्द्र सजाये हैं
बुद्धिजीवी
कहलाते पर बुद्धिहीन यह भी हो जाते हैं
बना
के दुकानें समुदायों पर धार्मिक लबादे चढाते
इनकी
छतों तले कमजोर समूह इंसानो के लाते हैं
इंसानों
को सदैव कमजोर यह नेतागण ही करतेहैं
कर
कमजोर इंसानों को सियारों का रूप दे जाते हैं
नही
जानते ये तुम कमजोरों की बस्ती बसाते
हो
खुद
के बन जाते तुम दुश्मन जाने क्यों संसार में
यही
गर किसी ताकतवर को बनादो गर कमजोर
यहाँ
विश्वविजेता रूप से तेरे नाम का होगा शोर
पथिक अनजाना ( सतनाम सिंह साहनी )
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